Ruhani Shayari

Ishq ka matlab logo ne kuch aur hi nikaal liya hai ..
unhe kya pta ki ruh se chahne wale aashik baatein jismo ki karte nahi.

इश्क़ का मतलब लोगो ने कुछ और ही निकाल लिया है ..
उन्हें क्या पता की रूह से चाहने वाले आशिक़ बातें जिस्मों की करते नहीं …

Agar awaj degi to chala aaunga mein ..
apni ruh ko tujhse milane ke liye

अगर आवाज देगी तो चला आऊंगा में अपनी रूह को , तुझसे मिलाने के लिए .

Iss Gam ko to sab seh lete hai ,
pYar ka wada kar ke , fir tanha chor kar ,

bhi sab reh lete hai ,per usse kaise samjahau ki

iss ruh mein koi aur nahi tu hi basti hai ..

इस गम को तो सब सेह लेते है ..
प्यार का वादा कर के , फिर तनहा छोर कर ,
भी सब रह लेते है ,,,
पर उससे कैसे समझाऊं की ,,
इस रूह में कोई और नहीं सिर्फ तू ही बस्ती है ..

Ajeeb si kahani hai pyar ki mere
vo mujhse dur hai ,
aur meri ruh yahan tadap rahi hai ..

अजीब सी कहानी है प्यार की मेरे ,
वो मुझसे दूर है ,
और मेरी रूह यहाँ तड़प रही है ,

bechain hu uske jaane se , koi bta de ussse koi tadap rha hai ,tere na aane se .
बेचैन हु उसके जाने से ,
कोई बता दे उसे ,
कोई तड़प रहा है ,
तेरे ना आने से ,

khawab jo dekha maine tujhe apna banane ke ,
khawab hi reh gya .
खवाब जो देखा मैंने तुझे अपना बनाने के .. खवाब ही रह गए ,,,

shayri ko log bas shayri samajhte hai ..
jra hamse bhi aakar pucho ke kitni tadap hoti hai isse banane mein …

शायरी को बस शायरी समझते है ,,
जरा हमसे भी आकर पूछो कितनी तड़प होती है इससे बनाने में ..

kuch toh kharabi dikhi hogi mujhme bhi ..
jo iss kadar ruswa hue tum hamse.
कुछ तो खराबी होगी मुझमें भी ..
जो इस कदर रुस्वा हुए तुम हमसे …

Tujhko yakeen nahi hai abb bhi ..
teri chahton ne kitna tadpaya hai mujhe …
akele rehna to sikh liya hamne …
per is akelepan ne kitna sataya hai hame ..

 

तुझको यकीन नहीं है अब्ब भी
तेरी चाहतों ने कितना तड़पाया है मुझे ..
अकेले रहना तो सिख लिया हमने ,,
पर इस अकेले पैन ने कितना सताया है हमें ..

Teri chahat hame bhi hai …
per kya kare … tu chahta bhi to ..
kisi aur ko hai …🤨

तेरी चाहत हमें भी है ..
पर क्या करे ..
तू चाहता भी तो किसी और को है …